बिहार के मखाने को ग्लोबल ब्रांड बनाने की तैयारी, 21 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ

उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और प्रसंस्करण को बढ़ावा; लागत का 75% तक मिलेगा अनुदान
पटना, 7 सितंबर 2026। बिहार के मखाने को वैश्विक पहचान दिलाने और मखाना उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘मखाना विकास योजना’ को नए स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। योजना के तहत उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन तक की पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना बिहार का गौरव और सांस्कृतिक पहचान है। सरकार का लक्ष्य मखाना खेती को पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़ाकर आधुनिक और व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करना है। किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बिहार का मखाना अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचे और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
21 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन में 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखता है। ‘मखाना विकास योजना’ के तहत 21 मखाना उत्पादक जिलों में वैज्ञानिक पद्धति से उत्पादन और आधुनिक प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाएगा।
इन जिलों में दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, सीतामढ़ी, मधेपुरा, अररिया, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली और पटना शामिल हैं।
लागत का 75 प्रतिशत तक अनुदान
मखाना की खेती के नए क्षेत्रों में विस्तार और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए सरकार की ओर से लागत का 75 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा पारंपरिक तालाब प्रणाली के साथ खेत प्रणाली में भी मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को अधिक उपज देने वाली उन्नत प्रजातियों ‘सबौर मखाना-1’ और ‘स्वर्ण वैदेही’ के गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने पर भी जोर है।
आधुनिक किट से आसान होगी प्रसंस्करण प्रक्रिया
मखाना निकालने और फोड़ने की पारंपरिक प्रक्रिया में लगने वाले श्रम और समय को कम करने के लिए पारंपरिक एवं आधुनिक किट की खरीद पर भी 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इससे प्रसंस्करण प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
कच्चे मखाने के बजाय वैल्यू एडेड उत्पादों पर फोकस
सरकार अब किसानों को केवल कच्चे मखाने के उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय मखाना पाउडर और अन्य रेडी-टू-ईट एवं मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण से जोड़ने की तैयारी कर रही है।
मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद बिहार के मखाने की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत हुई है। अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और पूर्वी एशिया में बढ़ती मांग को देखते हुए प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बाजार विस्तार का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।
खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी मिलेगी सहायता
कृषि आधारित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) तथा राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के सहयोग से मखाना प्रसंस्करण इकाई, ग्रेडिंग एवं छंटाई मशीन और पैकेजिंग इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
इससे उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, मूल्यवर्धन और मार्केटिंग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
किसान और FPO ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन
मखाना विकास योजना और संबंधित अनुदान योजनाओं का लाभ लेने के इच्छुक किसान, एफपीओ और महिला स्वयं सहायता समूह उद्यान निदेशालय की वेबसाइट तथा बिहार कृषि ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित प्रखंड उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे मखाना विकास से जुड़ी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और वैज्ञानिक पद्धति एवं आधुनिक तकनीक अपनाकर मखाना उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाएं। सरकार का लक्ष्य बिहार के मखाने को स्थानीय पहचान से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में स्थापित करना तथा मखाना उत्पादक किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना है।








