पटना में घर से दुकान-ऑफिस चलाने वालों पर नगर निगम की कार्रवाई तेज, 26,746 मामलों से शुरू हुआ विवाद; 24 आवासीय कॉलोनियां भी रडार पर

पटना: पटना नगर निगम क्षेत्र में आवासीय मकानों और भूखंडों के गैर-आवासीय एवं व्यावसायिक इस्तेमाल का मामला अब बड़े प्रशासनिक और कानूनी मुद्दे में बदल गया है। घर को दुकान, ऑफिस, गोदाम, संस्थान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने वाले संपत्ति मालिकों की जांच और सुनवाई नगर निगम द्वारा की जा रही है।
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं। पटना नगर निगम की आधिकारिक सार्वजनिक सूचना के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के 25 मार्च 2026, 20 मई 2026, 9 जुलाई 2026 और 5 अगस्त 2026 के आदेशों के अनुपालन में नगर निगम के सभी अंचलों में आवासीय क्षेत्रों में किए जा रहे अनधिकृत गैर-आवासीय उपयोग का वार्डवार सर्वे कराया गया है।
26,746 संपत्तियां सर्वे में चिह्नित
नगर निगम के सर्वे में 26,746 ऐसे मामले सामने आए, जहां आवासीय संपत्तियों का गैर-आवासीय अथवा व्यावसायिक इस्तेमाल पाया गया।
सुप्रीम कोर्ट में पेश नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक यह संख्या सामने आने के बाद अदालत ने नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड से संबंधित उपलब्ध आदेश में 26,746 मामलों का उल्लेख है।
नगर निगम ने इसके बाद संबंधित संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया और अंचल स्तर पर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की।
किस अंचल में कितने मामले?
नगर निगम के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 26,746 मामलों का अंचलवार विवरण इस प्रकार है:
पटना नगर निगम अंचल| चिह्नित मामले
कंकड़बाग अंचल| 7,072
पाटलिपुत्र अंचल| 5,798
बांकीपुर अंचल| 5,051
अजीमाबाद अंचल| 3,476
पटना सिटी अंचल| 3,137
नूतन राजधानी अंचल| 2,212
कुल| 26,746
इन आंकड़ों की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टिंग में भी की गई है।
यानी शुरुआती सर्वे में सबसे अधिक मामले कंकड़बाग अंचल में और सबसे कम नूतन राजधानी अंचल में सामने आए।
क्या हर घर से दुकान या ऑफिस चलाना गैरकानूनी है?
यह इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
सिर्फ इसलिए कि किसी आवासीय मकान में कोई काम किया जा रहा है, हर मामले को स्वतः अवैध नहीं माना जा सकता। यह देखना जरूरी है कि संबंधित भूखंड का Land Use क्या है, सड़क की चौड़ाई कितनी है, भवन का स्वीकृत नक्शा क्या कहता है, मास्टर प्लान में उस क्षेत्र की श्रेणी क्या है और संबंधित गतिविधि के लिए अनुमति/एनओसी उपलब्ध है या नहीं।
पटना मास्टर प्लान-2031 में भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित हैं। बिहार भवन उपविधि में भी Land Use Classification और Permissible Uses का प्रावधान है। पटना नगर निगम के Building Plan Approval System में स्पष्ट किया गया है कि भवन उपविधि का Chapter-III पटना मास्टर प्लान-2031 के Land Use Classification एवं Permissible Uses से जुड़ा है।
इसलिए नोटिस मिलना अंतिम रूप से दोषी ठहराया जाना नहीं है। नोटिस के बाद संबंधित व्यक्ति अपना दस्तावेज और पक्ष नगर निगम के सामने रख सकता है।
किन दस्तावेजों के आधार पर होगा फैसला?
पटना नगर निगम की आधिकारिक सूचना के अनुसार सुनवाई में संबंधित संपत्ति मालिक/निर्माता/डेवलपर/गैर-आवासीय उपयोगकर्ता को मुख्य रूप से ये दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं:
1. गैर-आवासीय उपयोग की अनुमति/एनओसी से संबंधित प्रमाण
2. जमीन या संपत्ति का स्वामित्व दस्तावेज
3. स्वीकृत भवन नक्शा
4. Occupancy Certificate यानी अधिभोग प्रमाण-पत्र
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। अनुपस्थित रहने की स्थिति में उपलब्ध सर्वे और दस्तावेजों के आधार पर अंतिम आदेश पारित किया जा सकता है।
24 प्रमुख आवासीय कॉलोनियां भी निगरानी में
पटना मास्टर प्लान-2031 के संदर्भ में शहर की 24 आवासीय कॉलोनियों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है।
बिहार सरकार की 11 कॉलोनियां
– राजवंशी नगर
– शास्त्री नगर
– गर्दनीबाग
– श्रीकृष्ण पुरी
– पाटलिपुत्र कॉलोनी
– कंकड़बाग कॉलोनी
– बहादुरपुर कॉलोनी
– राजेंद्र नगर कॉलोनी
– हनुमान नगर
– छज्जूबाग
– सीडीए कॉलोनी
केंद्र सरकार की 3 कॉलोनियां
– पीएनटी कॉलोनी
– राजस्व कॉलोनी
– आरबीआई कॉलोनी
निजी 10 कॉलोनियां
– आशियाना नगर
– कृषि नगर
– पुलिस कॉलोनी
– बीएम कॉलोनी
– एजी कॉलोनी
– राजीव नगर
– बुद्धा कॉलोनी
– श्रीकृष्ण नगर (आईएएस कॉलोनी)
– आनंदपुरी
– एमएमए फ्लैट कॉलोनी
इन कॉलोनियों में आवासीय उपयोग और गैर-आवासीय गतिविधियों को लेकर निगम की जांच महत्वपूर्ण है।
पटना मास्टर प्लान-2031 क्या है?
Master Plan किसी शहर के भविष्य के नियोजित विकास का भूमि-उपयोग और विकास नियंत्रण दस्तावेज होता है। इसमें यह तय किया जाता है कि किस क्षेत्र में आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, सार्वजनिक, परिवहन, हरित क्षेत्र आदि किस प्रकार का विकास किया जा सकता है।
पटना मास्टर प्लान-2031 में Residential Zone को मुख्य रूप से R-1 और R-2 में वर्गीकृत किया गया है।
– R-1: प्रस्तावित contiguous/core area का Residential Zone
– R-2: प्रस्तावित growth nodes का Residential Zone
इसी प्रकार Commercial Zone को C-1 और C-2 श्रेणियों में बांटा गया है।
पटना महानगर क्षेत्र प्राधिकार की वेबसाइट पर 24 जून 2026 की तारीख के साथ पटना मास्टर प्लान दस्तावेज उपलब्ध है।
पटना नगर निगम क्षेत्र में कितनी जमीन आवासीय है?
मास्टर प्लान के उपलब्ध भूमि-उपयोग आंकड़ों के अनुसार पटना नगर निगम क्षेत्र की लगभग 104.22 वर्ग किलोमीटर भूमि का वर्गीकरण किया गया था।
इसमें:
– आवासीय — 49.56 वर्ग किमी यानी 47.55%
– खाली/कृषि भूमि — 18.40 वर्ग किमी यानी 17.66%
– सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक — 10.61 वर्ग किमी यानी 10.18%
– परिवहन/सड़क — 6.15 वर्ग किमी यानी 5.90%
– व्यावसायिक — 4.65 वर्ग किमी यानी 4.46%
– मिश्रित उपयोग — 3.52 वर्ग किमी यानी 3.37%
– औद्योगिक — 1.09 वर्ग किमी यानी 1.05%
ये आंकड़े मास्टर प्लान के Land Use वर्गीकरण से संबंधित हैं।
सबसे महत्वपूर्ण नियम: Residential क्षेत्र में भी कुछ Commercial Use की गुंजाइश
मास्टर प्लान में Residential character को बनाए रखते हुए कुछ परिस्थितियों में मिश्रित उपयोग/व्यावसायिक गतिविधियों की व्यवस्था दी गई है।
मास्टर प्लान-2031 की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ निर्धारित परिस्थितियों में आवासीय क्षेत्र में commercial space की सीमा सड़क की चौड़ाई और plot size से जुड़ी है।
रिपोर्ट में उदाहरण के तौर पर:
– 12 मीटर सड़क: न्यूनतम 500 वर्गमीटर प्लॉट और अधिकतम 20% built-up area commercial
– 18 मीटर सड़क: न्यूनतम 1,000 वर्गमीटर प्लॉट और अधिकतम 30%
– 30 मीटर या उससे अधिक सड़क: न्यूनतम 1,500 वर्गमीटर प्लॉट और अधिकतम 40%
साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि mixed land use निर्धारित शर्तों के अधीन 40 फीट या उससे अधिक चौड़ी सड़कों से लगे प्लॉटों पर अनुमति योग्य हो सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर आवासीय मकान में दुकान या ऑफिस स्वतः वैध हो गया। संबंधित प्लॉट, सड़क, भवन का नक्शा, अनुमत गतिविधि और लागू नियमों की जांच आवश्यक है।
27,395 नोटिस का आंकड़ा कहां से आया?
बाद के चरण में नगर निगम की कार्रवाई का आंकड़ा 27,395 संपत्तिधारकों को नोटिस तक पहुंचा। सितंबर 2026 की रिपोर्ट में नगर निगम की ओर से 27,395 संपत्ति मालिकों को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई।
वहीं अगस्त की रिपोर्टिंग में 26,745/26,746 मामलों में नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया का उल्लेख था। इसलिए रिपोर्टिंग करते समय 26,746 को मूल सर्वे में मिले मामलों और 27,395 को बाद के नोटिस चरण के आंकड़े के रूप में अलग-अलग रखना अधिक सटीक होगा।
50 हजार से ज्यादा नए मामले भी सर्वे में?
अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम द्वारा आगे किए गए सर्वे में 50 हजार से अधिक नए मामले चिह्नित किए जाने की बात सामने आई है। नगर निगम ने सभी छह अंचलों के कार्यपालक पदाधिकारियों से नोटिस, सुनवाई और आगे की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।
यह आंकड़ा 26,746 पुराने मामलों में सीधे जोड़कर 76 हजार से अधिक मामले बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि 50 हजार+ को नए सर्वे में सामने आए मामलों के रूप में रिपोर्ट किया गया है और दोनों सूचियों के overlap/डुप्लीकेशन का आधिकारिक समेकित आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।
नगर निगम की वेबसाइट पर संपत्तियों की सूची भी उपलब्ध
पटना नगर निगम की आधिकारिक Public Notice में अंचलवार और वार्डवार सर्वेक्षित संपत्तियों की सूची उपलब्ध कराई गई है। इसमें कई मामलों में वार्ड नंबर, PID/SAS नंबर, संपत्ति मालिक का नाम, पता और उपयोग की श्रेणी जैसे विवरण दिए गए हैं।
उदाहरण के तौर पर पाटलिपुत्र अंचल की सूची में Digha, Rajeev Nagar आदि इलाकों की संपत्तियों को Shops, Other, Godowns, Parking और Workshops जैसी श्रेणियों में दर्ज किया गया है।
इसलिए किसी व्यक्ति को यह जानना हो कि उसका अपना मकान/प्लॉट निगम के सर्वे में शामिल है या नहीं, तो केवल कॉलोनी का नाम देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय नगर निगम की आधिकारिक सूची में PID, नाम, पता या वार्ड के आधार पर जांच करना ज्यादा विश्वसनीय तरीका है।
क्या कार्रवाई सीधे सीलिंग होगी?
नहीं। वर्तमान प्रक्रिया को केवल “नोटिस मिला और मकान सील होगा” के रूप में समझना सही नहीं होगा।
पहले सर्वे → नोटिस → दस्तावेज/आपत्ति → सुनवाई → नियमों के अनुसार निर्णय की प्रक्रिया है।
जहां संबंधित गतिविधि नियमों के अनुरूप साबित होती है, वहां स्थिति अलग हो सकती है। लेकिन यदि किसी संपत्ति में स्वीकृत Land Use के विपरीत अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग पाया जाता है और संबंधित पक्ष वैध अनुमति नहीं दिखा पाता, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई हो सकती है।
नगर निगम की आधिकारिक सूचना में भी सुनवाई और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
मेयर को भी मिला नोटिस
इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि पटना नगर निगम की मेयर सीता साहू के आवासीय परिसर को लेकर भी अजीमाबाद अंचल की ओर से नोटिस जारी किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार नोटिस में गैर-आवासीय उपयोग से संबंधित दस्तावेज, स्वामित्व प्रमाण, स्वीकृत नक्शा और Occupancy Certificate मांगा गया था। मेयर के परिवार की ओर से परिसर के आवासीय उपयोग में होने की बात कही गई।
यह उदाहरण बताता है कि कार्रवाई किसी पद या व्यक्ति तक सीमित नहीं रखी जा रही है; हालांकि प्रत्येक मामले का अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेज और जांच पर निर्भर करेगा।
सरकार ने बनाई पांच सदस्यीय समिति
इस पूरे विवाद के समाधान के लिए बिहार सरकार ने भी हस्तक्षेप किया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 25 अगस्त 2026 को आवासीय मकानों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित नगर निगम के नोटिस के समाधान के लिए उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की।
इससे स्पष्ट है कि मामला केवल नगर निगम की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार स्तर पर भी इसके व्यावहारिक समाधान पर विचार किया जा रहा है।
आम संपत्ति मालिकों के लिए सबसे अहम बात
यदि किसी आवासीय मकान में दुकान, ऑफिस, क्लिनिक, गोदाम, संस्थान या अन्य गतिविधि चल रही है, तो संपत्ति मालिक को सबसे पहले ये दस्तावेज देखने चाहिए:
Land Use → Approved Building Plan → Occupancy Certificate → सड़क की चौड़ाई → Plot Size → संबंधित Commercial/Mixed Use अनुमति/NOС → संपत्ति का वास्तविक उपयोग।
सिर्फ वर्षों से बिजली कनेक्शन, होल्डिंग टैक्स या व्यावसायिक टैक्स जमा करने से यह स्वतः साबित नहीं होता कि Land Use भी व्यावसायिक है। दूसरी तरफ, सिर्फ “Residential” लिखे होने से भी हर प्रकार की गतिविधि स्वतः प्रतिबंधित नहीं मानी जा सकती; मास्टर प्लान और भवन उपविधि में अनुमत गतिविधियों और विशेष अनुमति की श्रेणियां भी हैं।
निष्कर्ष
पटना में चल रही कार्रवाई का मूल प्रश्न यह है कि किस आवासीय भूखंड पर कौन-सी गैर-आवासीय गतिविधि वैध है और कौन-सी बिना अनुमति के है।
26,746 मामले नगर निगम के शुरुआती बड़े सर्वे का आंकड़ा हैं। इसके बाद 27,395 नोटिस का आंकड़ा सामने आया और अक्टूबर 2026 में 50 हजार से अधिक नए मामलों की पहचान की रिपोर्ट भी सामने आई। इन आंकड़ों को अलग-अलग चरणों के रूप में देखना जरूरी है।
अंतिम निर्णय प्रत्येक संपत्ति के स्वीकृत नक्शे, Land Use, Master Plan, सड़क की चौड़ाई, प्लॉट क्षेत्रफल, अनुमति/एनओसी और वास्तविक उपयोग की जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।
नोट: किसी व्यक्ति की संपत्ति को “अवैध” या “सील होने योग्य” कहना तब तक उचित नहीं होगा, जब तक नगर निगम की जांच और सुनवाई के बाद सक्षम प्राधिकारी का अंतिम आदेश सामने न आ जाए।








