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मां के खाते से 5.27 करोड़ का ट्रांजेक्शन, पति-पत्नी समेत पूरा गिरोह फरार; कई राज्यों में फैला था साइबर जाल

पुणे में शिकायत के बाद खुला करोड़ों की साइबर ठगी का राज

पटना। बिहार की राजधानी पटना से साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि एक बेटे ने अपनी मां के नाम पर बैंक खाता खुलवाकर करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए। मात्र छह महीनों के भीतर इस खाते से लगभग 5.27 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया।

सूत्रों के अनुसार, पुणे से दर्ज एक साइबर शिकायत के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं। शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर रितेश कुमार और अनीता कुमारी से जुड़े संदिग्ध लेनदेन वाले बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया। इसके बाद करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ।

पोस्टल पार्क स्थित बैंक शाखा से जुड़ा मामला

जानकारी के अनुसार, पटना के पोस्टल पार्क स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा में मृदुला कांति के नाम से एक बचत खाता खोला गया था। हालांकि जांच में पाया गया कि खाते का संचालन उनका बेटा कर रहा था। बैंक रिकॉर्ड की जांच में करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चला, जिसके बाद मामला साइबर थाना पहुंचा।

राष्ट्रीय स्तर पर फैला साइबर नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह केवल बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के कई राज्यों में सक्रिय था। पुणे, इंदौर, पटना समेत अन्य शहरों में इनके नेटवर्क के तार जुड़े हुए पाए गए हैं।

सूत्र बताते हैं कि गिरोह लोगों को निवेश और पैसा दोगुना करने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाता था। आरोपी खुद को सफल निवेशक और कारोबारी बताकर बड़े-बड़े बैंक ट्रांजेक्शन दिखाते थे, जिससे लोगों का विश्वास जीत सकें।

ऐसे फंसाते थे लोगों को

 

गिरोह शेयर ट्रेडिंग, स्टॉक मार्केट, रियल एस्टेट निवेश और हाई रिटर्न स्कीम के नाम पर लोगों को जोड़ता था। शुरुआत में निवेशकों को छोटे-छोटे मुनाफे दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता था। इसके बाद उनसे लाखों और करोड़ों रुपये निवेश करवाए जाते थे।

बताया जा रहा है कि आरोपी तीन से चार महीने तक निवेशकों को लगातार संपर्क में रखते थे और फिर अचानक फोन बंद कर फरार हो जाते थे। कई पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने प्रॉपर्टी डील और बड़े बिजनेस प्रोजेक्ट में निवेश के नाम पर भी रकम वसूली।

साइबर अपराधियों की ‘लेयरिंग’ तकनीक

जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को छिपाने के लिए अपराधी “लेयरिंग” तकनीक का इस्तेमाल करते थे। इसके तहत पैसे को कई खातों में ट्रांसफर कर उसकी वास्तविक पहचान और स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती थी।

बैंक को इस खाते के संबंध में पहली शिकायत 9 अप्रैल 2026 को प्राप्त हुई थी। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने खाते की गहन जांच शुरू की, जिसमें संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं।

बैंक प्रबंधन ने दर्ज कराई प्राथमिकी

एचडीएफसी बैंक के शाखा प्रबंधक रितेश रंजन सिन्हा ने साइबर थाना पटना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। बैंक ने जांच एजेंसियों को केवाईसी दस्तावेज, खाता खोलने से संबंधित फॉर्म और अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की बात कही है।

करोड़ों की ठगी के कई मामले सामने आए

पटना के अनिसाबाद निवासी और रियल एस्टेट कारोबारी अमितेश कुमार ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनसे निवेश के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये की ठगी की गई। वहीं गोल्ड बॉन्ड की एनओसी दिलाने के नाम पर अतिरिक्त 15 लाख रुपये भी लिए गए।

अमितेश कुमार ने दीपक, प्रकाश, रवि और मोहम्मद तौसिफ अंसारी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

जांच में यह भी सामने आया कि एक खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 93.56 लाख रुपये मृदुला कांति के खाते में भेजे गए थे। बाद में इस राशि को कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया।

मीठापुर निवासी युवक से भी ठगी

जक्कनपुर के मीठापुर निवासी ओम प्रकाश ने भी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर लगभग 8.80 लाख रुपये की ठगी की गई। पैसे जमा कराने के बाद आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया।

एटीएम कार्ड फंसाकर निकाले लाखों रुपये

एक अन्य मामले में बेऊर निवासी कृष्ण कुमार सिंह का एटीएम कार्ड अनिसाबाद स्थित एसबीआई एटीएम में फंस गया। इसी दौरान बदमाशों ने उन्हें झांसा देकर उनके खाते से 2.25 लाख रुपये निकाल लिए। इस मामले में गर्दनीबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

जांच जारी, कई खुलासों की उम्मीद

पटना साइबर थाना और आर्थिक अपराध इकाई अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह में कितने लोग शामिल हैं, ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई और इसके पीछे कौन-कौन मास्टरमाइंड काम कर रहे हैं।

प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि साइबर अपराधी दूसरों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें “म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन किया जा सके।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

साइबर विशेषज्ञों और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति, निवेश योजना, ट्रेडिंग ऑफर या पैसा दोगुना करने के लालच में न आएं। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर थाने से संपर्क करें।

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