पाटलिपुत्र टाउनशिप पर हितधारकों का मंथन, 9 प्रखंडों के 273 गांवों में प्रस्तावित है विकास योजना

पटना, 22 अगस्त 2026। बिहार में सुनियोजित और आधुनिक शहरी विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित ‘पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना 2047’ को लेकर शनिवार को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में महत्वपूर्ण हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने की।
बैठक में सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नगर निकायों, CREDAI बिहार, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, बैंकिंग क्षेत्र, ITPI, IIA और IEI समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में प्रस्तावित टाउनशिप के विकास मॉडल का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया और हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियों पर चर्चा की गई।
9 प्रखंडों के 273 गांव होंगे योजना के दायरे में
प्रस्तावित पाटलिपुत्र टाउनशिप का क्षेत्रफल करीब 81,730 एकड़ बताया गया है। यह योजना पटना जिले के पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी प्रखंडों के 273 गांवों तक विस्तृत होगी।
इसके अलावा नौबतपुर नगर पंचायत का आंशिक क्षेत्र और पुनपुन नगर पंचायत का पूरा क्षेत्र भी विशेष क्षेत्र में शामिल किया गया है। योजना के अंतर्गत करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित है, जिसमें पुनपुन प्रखंड के 19 गांव शामिल हैं।
किसानों और भू-स्वामियों से होगा सीधा संवाद
नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि योजना की सफलता के लिए जनभागीदारी और निरंतर संवाद बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विभाग किसानों और भू-स्वामियों के बीच जाकर योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देगा और उनके सुझावों को गंभीरता से सुनेगा।
विशेष रूप से उन भू-स्वामियों से प्रत्यक्ष संवाद किया जाएगा जिनकी भूमि प्रस्तावित योजना के दायरे में आ रही है, ताकि उनकी सहभागिता और सहमति के साथ योजना को आगे बढ़ाया जा सके।
भूमि पूलिंग और पुनर्संयोजन पर जोर
प्रस्तावित टाउनशिप में विकास योजना, भूमि उपयोग योजना और टाउन प्लानिंग स्कीम को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। भूमि पूलिंग, भूमि पुनर्संयोजन अथवा लागू भूमि व्यवस्था के माध्यम से भू-स्वामियों को विकास प्रक्रिया में सहभागी बनाने का प्रयास किया जा सकता है।
योजना में छोटे भू-स्वामियों, किसानों और स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए सहभागी और न्यायसंगत विकास पर जोर दिया गया है।
आवास से लेकर रोजगार तक की सुविधाएं
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड टाउनशिप का उद्देश्य केवल नए भवनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण आधुनिक शहरी क्षेत्र विकसित करना है। प्रस्तावित योजना में आवास, रोजगार, सड़क, सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, पार्क, जलापूर्ति, सीवरेज और जल निकासी जैसी सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
योजना में Transit-Oriented Development (TOD), सार्वजनिक परिवहन, पैदल और साइकिल सुविधाओं तथा मिश्रित भूमि उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। साथ ही हरित गलियारे, सेक्टर पार्क, सामुदायिक पार्क, खेल क्षेत्र और जल निकायों के संरक्षण पर भी जोर दिया गया है।
निवेश और रोजगार के नए अवसर की उम्मीद
सरकार का मानना है कि पाटलिपुत्र टाउनशिप के विकास से पटना के सुनियोजित विस्तार के साथ-साथ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। इससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित होने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
यह परियोजना बिहार के भविष्य के शहरी विकास के लिए एक आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल, आर्थिक रूप से सक्रिय और नागरिक-केंद्रित मॉडल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विभाग के अनुसार, हितधारकों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को योजना को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए महत्वपूर्ण इनपुट के रूप में लिया जाएगा। आने वाले समय में किसानों, भू-स्वामियों और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद की प्रक्रिया जारी रहेगी।
बेहतर शहर, बेहतर अवसर और बेहतर बिहार की परिकल्पना के साथ पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को आने वाली पीढ़ियों के लिए योजनाबद्ध और सतत शहरी विकास की आधारशिला के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।









