पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने हाल ही में महिलाओं और राजनीति को लेकर एक बेहद विवादित बयान दिया है, जिसके कारण काफी हंगामा हो रहा है।
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (131वां संवैधानिक संशोधन बिल, 2026) पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा:
”बिना नेता के कमरे (बेडरूम) में गए 90% महिलाएं राजनीति नहीं कर सकतीं।”
उनके बयान की मुख्य बातें:
शोषण का आरोप: उन्होंने दावा किया कि राजनीति में महिलाओं का बड़े पैमाने पर शोषण होता है। उनके अनुसार, सिस्टम और समाज इसके लिए जिम्मेदार हैं और कई नेता महिलाओं को सिर्फ “भोग की वस्तु” समझते हैं।
नेताओं पर हमला: उन्होंने कहा कि नेताओं की दृष्टि महिलाओं पर “गिद्ध” जैसी होती है और कई रसूखदार लोग राजनीति में आने वाली महिलाओं का फायदा उठाते हैं।
शिक्षा और दफ्तरों का जिक्र: उन्होंने केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि स्कूलों, कॉलेजों (रैगिंग के नाम पर) और दफ्तरों में भी महिलाओं के शोषण की बात कही।
मामले की वर्तमान स्थिति:
महिला आयोग का नोटिस: बिहार राज्य महिला आयोग ने इस बयान का स्वतः संज्ञान लेते हुए पप्पू यादव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे 3 दिन के भीतर जवाब मांगा है और पूछा है कि उनकी संसद सदस्यता रद्द करने की सिफारिश क्यों न की जाए।
भारी विरोध: भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने इस बयान को बेहद “घिनौना” और “महिला विरोधी” बताया है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने इसे ‘नारी शक्ति’ का अपमान करार दिया है।
पप्पू यादव की सफाई: विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनका इरादा यह बताना था कि सिस्टम में महिलाओं का शोषण कितना गहरा है, न कि महिलाओं का अपमान करना। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी बात पर कायम हैं कि राजनेता महिलाओं का शोषण करते हैं।
यह मामला अभी काफी गर्माया हुआ है क्योंकि उनकी अपनी पत्नी, रंजीत रंजन भी एक सक्रिय राजनीतिज्ञ और सांसद रही हैं।









