बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग राज्य को मछली आहार उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए तेजी से काम कर रहा है। वर्तमान में राज्य अपनी आवश्यकता के आधे से अधिक मछली आहार का उत्पादन खुद कर रहा है। विभागीय प्रयासों के तहत राज्य में लगभग 79 फिश फीड मिल संचालित हैं, जहां कुल मिलाकर 50 हजार टन मछली आहार का उत्पादन हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पूरक आहार की पर्याप्त उपलब्धता से राज्य में मछली उत्पादन और उत्पादकता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
⚙️ सरकारी सहायता और योजनाएं
राज्य सरकार मछली चारा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए फीड मिलों को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
100 टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता वाले फीड मिलों को
₹3 प्रति यूनिट बिजली सब्सिडी
अधिकतम ₹2 लाख प्रति माह
अधिकतम ₹24 लाख प्रति वर्ष तक सहायता दी जा रही है
इससे निवेश को बढ़ावा मिल रहा है और नए फीड मिल स्थापित हो रहे हैं।
📦 मछली निर्यात में भी बढ़त
बिहार अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राज्य से अब तक 39.07 हजार टन मछलियों का निर्यात किया जा चुका है। प्रमुख गंतव्य शामिल हैं:
नेपाल, सिलीगुड़ी, लुधियाना, अमृतसर, वाराणसी, गोरखपुर, रांची और अन्य शहर।
बिहार की मछलियों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे आने वाले समय में निर्यात और बढ़ने की संभावना है।
📊 उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि
पिछले एक दशक में बिहार ने मछली उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है:
2013-14: राष्ट्रीय रैंकिंग में 9वां स्थान
2023-24: बढ़कर 4था स्थान
2023-24: 8.73 लाख मीट्रिक टन उत्पादन
2024-25: 9.59 लाख मीट्रिक टन उत्पादन
लगभग 100% वृद्धि के साथ बिहार देश के प्रमुख मछली उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है।
📌 निष्कर्ष
मछली आहार उत्पादन, सरकारी सहयोग और बढ़ते निर्यात के कारण बिहार मत्स्य क्षेत्र में मजबूत और स्थिर विकास की ओर अग्रसर है। आने वाले समय में राज्य पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी भूमिका निभा सकता है।









