बिहार सरकार ने राज्य के नगर निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को समय पर भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम चार माह हेतु 4.81 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सहायक अनुदान के रूप में स्वीकृत की है। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों को सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मंत्री ने बताया कि राज्य के 18 नगर निगमों के महापौर, उपमहापौर एवं वार्ड पार्षदों को देय नियत भत्ते के भुगतान के लिए 1 करोड़ 54 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, 89 नगर परिषदों के सभापति, उपसभापति एवं वार्ड पार्षदों के भत्ते के भुगतान के लिए 2 करोड़ 17 लाख 64 हजार रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके अलावा राज्य की 153 नगर पंचायतों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं वार्ड पार्षदों के भत्ते के लिए 1 करोड़ 54 लाख 92 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, पटना नगर निगम के महापौर, उपमहापौर एवं वार्ड पार्षदों को देय भत्ते के भुगतान के लिए 8 लाख 38 हजार रुपये की अलग से स्वीकृति प्रदान की गई है।
श्री मिश्रा ने कहा कि नगर निकाय लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की आधारभूत इकाइयाँ हैं और जनप्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर नागरिकों की समस्याओं के समाधान तथा विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके निर्धारित भत्तों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
मंत्री ने विश्वास जताया कि स्वीकृत राशि से जनप्रतिनिधियों को समय पर भत्ते का भुगतान होगा और वे अपने दायित्वों का निर्वहन अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।
मुख्य बिंदु:
नगर निकाय जनप्रतिनिधियों के भत्ते हेतु 4.81 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत।
18 नगर निगमों के लिए 1 करोड़ 54 हजार रुपये का अनुदान।
89 नगर परिषदों के लिए 2.17 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत।
153 नगर पंचायतों के लिए 1.54 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान।
पटना नगर निगम के लिए अलग से 8.38 लाख रुपये की स्वीकृति।
सरकार का दावा, समय पर भत्ता भुगतान से जनप्रतिनिधियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।









