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बिहार में अब डिजिटल होगी खाद की बिक्री व्यवस्था, 1 सितंबर से 19 जिलों में लागू होगा नया सिस्टम

बिहार में अब डिजिटल होगी खाद की बिक्री व्यवस्था, 1 सितंबर से 19 जिलों में लागू होगा नया सिस्टम

FSAS, iFMS और AgriStack के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री में बढ़ेगी पारदर्शिता; 2 अक्टूबर से पूरे बिहार में लागू होगी व्यवस्था

 

पटना, 31 अगस्त 2026। बिहार में किसानों को उर्वरक की आसान और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत FSAS (Framework for Fertilizer Sale Application System) के माध्यम से उर्वरक की बिक्री को डिजिटल किया जा रहा है। FSAS को iFMS और AgriStack से जोड़ा गया है, जिससे उर्वरक की खरीद-बिक्री, स्टॉक और वितरण की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।

 

कृषि भवन सभागार, मीठापुर, पटना में सोमवार को ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ विषय पर आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक समय पर और सुगमता से उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

 

Farmer ID से मिलेगी किसान की जानकारी

 

कृषि मंत्री ने बताया कि जिन किसानों की भूमि संबंधी जानकारी Farmer Registry में उपलब्ध है, उनके आवश्यक विवरण Farmer ID के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे। वहीं, जिन किसानों का विवरण Farmer Registry में उपलब्ध नहीं है, वे भी FSAS पर पंजीकरण कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।

 

इसके लिए किसान को उस खेत का खाता संख्या, खेसरा संख्या, क्षेत्रफल और फसल का विवरण उपलब्ध कराना होगा, जिसके लिए उर्वरक की आवश्यकता है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर ICAR की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरक की आवश्यकता निर्धारित की जाएगी।

 

इसके बाद किसान को एक QR Code उपलब्ध कराया जाएगा। यह QR Code तीन दिनों तक वैध रहेगा। किसान इसी QR Code के माध्यम से उसमें अंकित अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान कर खाद खरीद सकेंगे।

 

वैशाली और शेखपुरा से शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट

 

डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट सबसे पहले वैशाली और शेखपुरा जिलों में शुरू किया गया था। इसके बाद इसे अन्य जिलों में विस्तार दिया गया।

 

कृषि मंत्री के अनुसार, 1 सितंबर 2026 से बिहार के 19 जिलों में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद 2 अक्टूबर 2026 से पूरे बिहार में इस व्यवस्था को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

 

कालाबाजारी और जमाखोरी पर होगी कार्रवाई

 

विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर उर्वरक की बिक्री, कालाबाजारी, जमाखोरी या किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए।

 

उन्होंने कहा कि किसानों को खाद लेने के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत किसानों को उर्वरक की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

 

अधिकारियों को फील्ड में निगरानी के निर्देश

 

कृषि मंत्री ने कहा कि केवल ऑनलाइन आंकड़ों के आधार पर उर्वरक की निगरानी पर्याप्त नहीं है। अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में जाकर उर्वरक के स्टॉक, वास्तविक उपलब्धता, वितरण और बिक्री व्यवस्था का जायजा लेना होगा।

 

उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में नई डिजिटल व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का निर्देश दिया।

 

किसानों की सुविधा के लिए तकनीक का इस्तेमाल

 

कृषि मंत्री ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था को सिर्फ तकनीकी बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि किसान हित में किए जा रहे प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तकनीक के कारण किसी किसान को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य किसान की सुविधा बढ़ाना है, उसकी कठिनाई बढ़ाना नहीं।

 

साथ ही, सभी उर्वरक विक्रेताओं को नई डिजिटल व्यवस्था की जानकारी देने और आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। किसानों को भी Farmer ID, FSAS पंजीकरण और उर्वरक खरीद की नई प्रक्रिया के संबंध में सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

 

कृषि मंत्री ने कहा कि ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के हित में कृषि विभाग की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। सरकार का उद्देश्य उर्वरक बिक्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित, जवाबदेह और किसान-केंद्रित बनाना है।

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