पटना विश्वविद्यालय में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की यूनिट का सम्मेलन बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन का आयोजन पटना कॉलेज के BMC विभाग में किया गया, जिसकी शुरुआत छात्रों के जोशीले नारों के साथ हुई— “लड़ो पढ़ाई करने को, पढ़ो समाज बदलने को” और “नए भारत के वास्ते, भगत सिंह–अंबेडकर के रास्ते”।

सम्मेलन के दौरान छात्रों ने शिक्षा, सामाजिक न्याय और कैंपस लोकतंत्र से जुड़े अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। इस दौरान छात्रों ने केंद्र और राज्य सरकार से कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सशक्त UGC रेगुलेशन लागू करने, 65 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी करने, NEP 2020 और VBSA बिल को वापस लेने, पटना विश्वविद्यालय में मजबूत जेंडर सेल (GSCASH) के गठन, छात्रों पर FIR की कार्रवाई बंद करने और विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग शामिल रही।
कार्यक्रम के खुले सत्र को मगध महिला कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. रंजना यादव ने संबोधित किया। उन्होंने कैंपस में लोकतांत्रिक और मजबूत छात्र आवाज की जरूरत पर जोर दिया। AISA के महासचिव प्रसेनजीत ने सामाजिक न्याय और नई शिक्षा नीति जैसे मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। वहीं, AISA बिहार अध्यक्ष प्रीति और इकबाल हॉस्टल के अमजद ने भी छात्रों को संबोधित किया।
सम्मेलन में पटना विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों और विभागों से आए छात्रों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। AISA की वार्षिक गतिविधियों की रिपोर्ट नितीश द्वारा प्रस्तुत की गई, जबकि अनुज ने कविता के जरिए छात्रों को अपनी आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। कई छात्रों ने भी मंच से अपने विचार साझा किए।
सांगठनिक सत्र में 33 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसके तहत 11 पदाधिकारियों का चयन हुआ, जिसमें नितीश को अध्यक्ष और सबा को सचिव चुना गया। उपाध्यक्ष पद पर आशीष, दीपू, अदिति, आदर्श और अमृता को जिम्मेदारी दी गई, जबकि ऋषि, प्रीति, श्रेयाशी और विवेक को संयुक्त सचिव बनाया गया।
नवनिर्वाचित टीम का साथियों ने तालियों की गूंज के साथ स्वागत किया। सम्मेलन के अंत में AISA पटना विश्वविद्यालय यूनिट ने छात्र हितों, सामाजिक न्याय और कैंपस लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया।









