पटना/बक्सर, 23 जून 2026। बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पटना उच्च न्यायालय में दायर प्रतिशपथ-पत्र का हवाला देते हुए बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी टेंडर प्रक्रिया, पोस्टिंग-ट्रांसफर और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सांसद ने कहा कि ED के आरोप केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी संस्थाओं के कथित दुरुपयोग, कमीशनखोरी और सत्ता से जुड़े नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं।

सुधाकर सिंह की ओर से जारी पांच पन्नों के प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जांच एजेंसी के अनुसार कुछ अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच कथित तौर पर ऐसा नेटवर्क संचालित हो रहा था, जिसमें सरकारी टेंडर दिलाने, भुगतान स्वीकृत कराने, अधिकारियों की पोस्टिंग प्रभावित करने तथा विभागीय निर्णयों में हस्तक्षेप के आरोप हैं। विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया है कि सरकारी परियोजनाओं में शामिल कंपनियों से कथित रूप से 5 से 7 प्रतिशत तक कमीशन वसूले जाने की बात सामने आई है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, Joshi Water Solution नामक कंपनी को बिहार में लगभग ₹1180 करोड़ मूल्य की परियोजनाएं मिली थीं। आरोप है कि टेंडर दिलाने, RA बिल पास कराने, भुगतान जारी कराने और विभागीय समन्वय के बदले कथित तौर पर ₹72 करोड़ के कमीशन का लेन-देन हुआ। सांसद ने कहा कि यदि जांच एजेंसी के आरोप सही हैं, तो यह बिहार की जनता के धन और विकास योजनाओं के साथ गंभीर धोखा है।
विज्ञप्ति में वित्त विभाग, शहरी विकास विभाग, भवन निर्माण विभाग, BUILDOCO और BMSICL से जुड़े कई अधिकारियों तथा विभागीय पदाधिकारियों के नाम जांच के संदर्भ में आने का दावा किया गया है। इसमें तत्कालीन अधिकारियों, इंजीनियरों और अन्य कर्मियों के संबंध में पोस्टिंग एवं टेंडर प्रक्रिया को लेकर आरोपों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि ये आरोप जांच एजेंसी के प्रतिशपथ-पत्र में दर्ज दावों पर आधारित हैं और दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
सांसद ने कहा कि ED के अनुसार 27 मार्च 2025 की छापेमारी के दौरान बिहार सरकार के अधिकारियों से जुड़े परिसरों से ₹11.64 करोड़ नकद बरामद होने की बात सामने आई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि यह धन वैध था तो उसका स्रोत सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और यदि अवैध था तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई हुई।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि ED ने कुछ अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं पर करीब ₹21.92 लाख खर्च किए जाने का उल्लेख किया है। सांसद ने पूछा कि एक सरकारी अधिकारी और उसके परिजनों की विदेश यात्रा का खर्च किन स्रोतों से हुआ तथा क्या इसके बदले किसी निजी कंपनी को सरकारी लाभ पहुंचाया गया।
सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार से चार प्रमुख सवाल पूछे हैं। पहला, ₹11.64 करोड़ नकदी बरामदगी के बाद किन अधिकारियों के खिलाफ क्या विभागीय कार्रवाई की गई। दूसरा, प्रतिबंधित कंपनी Jainam Engicon Pvt Ltd को कथित रूप से किसकी स्वीकृति और संरक्षण मिला। तीसरा, कई वर्षों तक अनेक विभागों में चल रहे कथित भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी किसकी है। चौथा, क्या राज्य सरकार इस पूरे मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराएगी तथा निष्कर्षों को न्यायपालिका और जनता के सामने रखेगी।
सांसद ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच केंद्रीय लोकपाल से कराई जाए, जांच पूरी होने तक आरोपित अधिकारियों को प्रभावशाली पदों से हटाया जाए और टेंडर, भुगतान तथा पोस्टिंग-ट्रांसफर से जुड़े सभी विभागीय निर्णयों की उच्चस्तरीय समीक्षा हो। उन्होंने कहा कि सरकार को विधानसभा और जनता के समक्ष श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिए कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आरोपों के समर्थन में PMLA के तहत बयान, व्हाट्सऐप चैट, बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल लेजर, ट्रैवल रिकॉर्ड, होटल बिल और विभागीय दस्तावेज होने का दावा किया गया है। सांसद ने कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि दोषी कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।









