पटना में ‘कैनवास क्रॉनिकल्स 3.0’ का भव्य आयोजन, युवा कलाकारों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा

पटना। दिल्ली पब्लिक स्कूल, पटना ईस्ट की ओर से अंतर-विद्यालयीय कला महोत्सव ‘कैनवास क्रॉनिकल्स 3.0’ का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष कला महोत्सव की थीम ‘फायर एंड आइस’ रखी गई, जिसमें विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और कलात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध टिकुली चित्रकार एवं कला विशेषज्ञ पद्मश्री अशोक कुमार बिस्वास उपस्थित रहे। वहीं, विशिष्ट अतिथि प्रख्यात रंगकर्मी, थिएटर निर्देशक एवं डिजाइनर तथा निर्देशन के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित परवेज अख्तर ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. राकेश अल्फ्रेड के मार्गदर्शन तथा उप-प्रधानाचार्य एम.डी. अशफाक इकबाल के नेतृत्व में आयोजित इस कला महोत्सव ने विद्यार्थियों को कला के विभिन्न रूपों में अपनी प्रतिभा और कल्पनाशीलता को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।
कई प्रतियोगिताओं में दिखी प्रतिभा
कैनवास क्रॉनिकल्स 3.0 के दौरान ड्रॉइंग एवं पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग, रंगोली निर्माण, स्क्रैप मेटल इंस्टॉलेशन, स्टिल लाइफ, फैंसी ड्रेस, टाई एंड डाई और कैनवास पेंटिंग सहित कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
प्रतिभागियों ने ‘फायर एंड आइस’ की थीम को अपने-अपने अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी कलाकृतियों में मौलिकता, रचनात्मक सोच और कलात्मक अभिव्यक्ति देखने को मिली।
प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में नीतू सिन्हा, तृप्ति रानी, संतोष कुमार और शबीना इमान शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन रचनात्मकता, मौलिकता, कलात्मक अभिव्यक्ति और प्रस्तुति के आधार पर किया।
संगीत प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समापन समारोह में विद्यालय के संगीत दल और बैंड ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह और उमंग भर दी। इसके बाद विशिष्ट अतिथि परवेज अख्तर ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायी संबोधन दिया और उन्हें कला के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके पश्चात पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।
समग्र विजेता: दिल्ली पब्लिक स्कूल, पटना ईस्ट
उपविजेता: नॉलेज ग्राम इंटरनेशनल स्कूल
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। कैनवास क्रॉनिकल्स 3.0 ने युवा कलाकारों की प्रतिभा और असीम कल्पनाशक्ति को मंच प्रदान करते हुए कला, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और आत्म-अभिव्यक्ति के महत्व को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया।









