सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढही, PG में रह रहे छात्रों के दबे होने की आशंका; राहत-बचाव अभियान जारी
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नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट इलाके में रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। मोती बाग-2 स्थित शिव मंदिर के पास एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। बताया जा रहा है कि इस इमारत में PG हॉस्टल संचालित हो रहा था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे। हादसे के बाद कई छात्रों और अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, स्थानीय पूछताछ में सामने आया है कि इमारत करीब 40-50 साल पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल PG हॉस्टल के रूप में किया जा रहा था। हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत और रेनोवेशन का काम चल रहा था।
छह लोगों को सुरक्षित निकाला गया

हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, NDRF, DDMA, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुट गईं। पुलिस के मुताबिक अब तक छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है।
CATS के नोडल अधिकारी बलराज सिंह ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि पांच लोगों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि मौके पर 17 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। हालांकि घायलों की स्थिति और कुल प्रभावित लोगों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दिल्ली अग्निशमन विभाग को दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी गई।
मलबे से आ रही थीं मदद की आवाजें
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि इमारत गिरने के बाद मलबे के अंदर से लोगों के चीखने और मदद मांगने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। एक छात्र ने बताया कि हादसे के समय अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में रहने वाले छात्रों के अलावा बेसमेंट में काम कर रहे मजदूर और आसपास मौजूद रेहड़ी-पटरी वाले भी हादसे की चपेट में आ सकते हैं।
हालांकि, मलबे में फंसे लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ लोगों ने 20 से 40 लोगों के दबे होने की आशंका जताई है, लेकिन इस संख्या की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बेसमेंट में चल रहा था रेनोवेशन का काम
प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि इमारत के बेसमेंट में मरम्मत और रेनोवेशन का काम चल रहा था। कुछ लोगों ने निर्माण कार्य के दौरान पिलर और स्ट्रक्चर में बदलाव किए जाने की आशंका भी जताई है।
हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। प्रशासन की ओर से घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
बगल की इमारत भी खाली कराई गई
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विसेज, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक एहतियात के तौर पर हादसे के बगल वाली इमारत को भी खाली करा लिया गया है। उन्होंने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
राजनीतिक नेताओं ने जताई चिंता
हादसे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वहीं, कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की मदद करने की मांग की।
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी घटना पर चिंता जताते हुए दिल्ली सरकार से राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तत्परता बरतने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारत में सुरक्षा नियमों और जरूरी अनुमतियों का पालन किया गया था या नहीं।

AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने भी घटना को लेकर सरकार और MCD पर सवाल उठाए तथा इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और बिल्डिंग विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर आरोप लगाए हैं।
छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन और आसपास का इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में पढ़ने वाले छात्रों के बीच PG और हॉस्टल के लिए जाना जाता है। हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
NSUI ने भी दावा किया कि मलबे में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र फंसे हो सकते हैं और घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान जारी है। मलबे से कितने लोगों को सुरक्षित निकाला गया, कितने लोग घायल हैं और कितने लोग अब भी अंदर फंसे हैं—इसकी अंतिम और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
नोट: मलबे में फंसे लोगों की संख्या को लेकर सामने आ रहे आंकड़े अभी अपुष्ट हैं। आधिकारिक आंकड़ा सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।









