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सत्तानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा

9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा तमिलनाडु के सत्तानकुलम (Sathankulam) कस्टोडियल डेथ केस में मिली है। यह मामला पूरे देश में बहुत चर्चित रहा क्योंकि इसमें एक पिता और बेटे की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। ⚖️🚨

पूरा मामला क्या था?

जून 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान P. Jeyaraj और उनके बेटे J. Bennix की मोबाइल दुकान देर तक खुली होने का आरोप लगा।

पुलिस उन्हें Sathankulam थाना ले गई।

आरोप है कि रातभर दोनों के साथ बुरी तरह मारपीट और यातना की गई।

बाद में दोनों की हालत बिगड़ गई और अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

देशभर में क्यों मचा था हंगामा?

घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया, मानवाधिकार संगठनों और जनता ने जोरदार विरोध किया।

मामला इतना बड़ा हुआ कि जांच राज्य पुलिस से हटाकर Central Bureau of Investigation (CBI) को दे दी गई। �

 

कोर्ट ने क्या कहा?

मदुरै की अदालत ने कहा कि यह “rarest of rare” मामला है।

कोर्ट ने माना कि जिन पुलिसकर्मियों को जनता की सुरक्षा करनी थी, उन्होंने ही कानून तोड़ा।

इसलिए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई और परिवार को ₹1.40 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया गया

अब आगे क्या होगा?

सेशन कोर्ट की फांसी की सजा सीधे लागू नहीं होती।

मामला अब हाई कोर्ट जाएगा।

हाई कोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट, और बाद में दया याचिका की प्रक्रिया भी हो सकती है। ⚖️

अगर चाहें तो मैं 9 दोषी पुलिसकर्मियों के नाम, कोर्ट का पूरा फैसला, या इस केस की टाइमलाइन भी दे सकता हूँ।

दोषी 9 पुलिसकर्मियों के नाम
P. Sridhar
Raghu Ganesh
Balakrishnan
Murugan
Muthuraj
Pauldurai
Selvam
Thomas Francis
Saminathan
घटना की टाइमलाइन
19 जून 2020: पिता P. Jeyaraj और बेटे J. Bennix को दुकान देर तक खुली रखने पर पुलिस ने पकड़ा।
थाने में रातभर मारपीट: परिवार ने आरोप लगाया कि दोनों को बेरहमी से पीटा गया।
22 जून 2020: पहले बेटे Bennix और फिर पिता Jeyaraj की अस्पताल में मौत हो गई।
इसके बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुआ।
केस की जांच Central Bureau of Investigation को सौंपी गई।
अदालत ने सभी 9 पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।
क्यों बना ऐतिहासिक मामला?
कस्टोडियल डेथ के मामलों में इतनी कड़ी सजा बहुत कम देखने को मिलती है।
अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा कानून का दुरुपयोग सबसे गंभीर अपराध है। ⚖️

कोर्ट ने किन सबूतों के आधार पर सजा दी?

थाने में मौजूद पुलिस रिकॉर्ड, गिरफ्तारी समय और मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों का उल्लेख मिला।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटें पाई गईं।

प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और पुलिस स्टेशन के आसपास मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए गए।

एक महिला पुलिसकर्मी ने भी अदालत में महत्वपूर्ण गवाही दी कि हिरासत में मारपीट हुई थी।

Central Bureau of Investigation ने चार्जशीट में यातना और साक्ष्य छिपाने की बात रखी।

परिवार ने क्या कहा?

पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला।

परिवार ने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया।

परिवार की मांग थी कि दोषियों को कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो।

अब हाई कोर्ट में क्या होगा?

सेशन कोर्ट की फांसी की सजा सीधे लागू नहीं होती।

मामला स्वतः Madras High Court जाएगा।

हाई कोर्ट सबूत, गवाही और फैसले की दोबारा समीक्षा करेगा।

हाई कोर्ट चाहे तो सजा बरकरार रख सकता है, बदल सकता है या कम कर सकता है।

इसके बाद Supreme Court of India में अपील और फिर दया याचिका का रास्ता खुला रहेगा।

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